Sudan Civil War 2023
जंग में मरे बाप, दिहाड़ी से मांएं और भूख से बच्चे [Civil War in Sudan] | DW Documentary हिन्दी
सूडान अप्रैल 2023 से गृहयुद्ध की ज़द में है. आम जनता के लिए इसके नतीजे बहुत भयानक रहे हैं. लाखों लोगों ने सुदूर नुबा माउंटेन्स में पनाह ली हुई है, जहां जंग थोड़ी कम है.
राजधानी खार्तूम में स्थित तानाशाही हुकूमत दक्षिणी सूडान के नुबा माउंटेन्स में रहने वाले लोगों को दशकों से प्रताड़ित कर रही है. इस सुदूर इलाक़े में आज भी पक्की सड़कें और मोबाइल कवरेज नहीं है. चिकित्सा सुविधाओं में भारी कमी यहां की सबसे बड़ी समस्या है.
इलाक़े के चंद अस्पतालों में से एक एक अस्पताल एक सर्जन और उनकी टीम लोगों का इलाज करने की जीतोड़ कोशिश कर रहे हैं. अप्रैल 2023 में गृहयुद्ध शुरू होने के बाद से हालात बहुत ख़राब हो गए हैं. मोर्चा पास में ही है, लेकिन अभी तक यह इलाक़ा सीधे-सीधे युद्ध से काफ़ी हद तक बचा हुआ है. हालांकि, सूडान की आधी आबादी की तरह यहां के लोगों पर भी अकाल का ख़तरा है.
सूडानीज़ आर्म्ड फ़ोर्सेज़ (SAF) और पैरामिलिट्री रैपिड सपोर्ट फ़ोर्सेज़ (RSF) के बीच गृहयुद्ध छिड़ा है और दोनों समूह अफ्ऱीका के इस तीसरे सबसे बड़े देश पर निगाहें गड़ाए हैं. इस सत्ता संघर्ष का आम जनता पर बड़ा विनाशकारी प्रभाव पड़ा है. देश की आबादी क़रीब पांच करोड़ है. उनमें से क़रीब ढाई करोड़ लोग मूलभूत खाद्य सुविधाओं के लिए जूझ रहे हैं और क़रीब 1.2 करोड़ लोग विस्थापित हो चुके हैं.
इस डॉक्यूमेंट्री में हॉस्पिटल ते डायरेक्टर जोसेफ़ याकूब की रोज़मर्रा की ज़िंदगी दिखाई गई है. वह इस इलाक़े में इकलौते सर्जन हैं और हॉस्पिटल में रोज़ बहुत सारे लोगों का इलाज करते हैं. उनके मरीज़ों में आख़िरी तिमाही की गर्भवती महिलाएं, घायल सैनिक और कुपोषण के शिकार बच्चों की मांएं भी शामिल हैं. हर किसी की मदद हो भी नहीं पाती है.
जोसेफ़ को नौकरी करते हुए ही सर्जरी करना सीखना पड़ा, क्योंकि नुबा माउंटेन्स में कोई यूनिवर्सिटी तो है नहीं. अब वह अपना ज्ञान निदाल दिफ़ान और अज़ीज़ बर्मा को सौंप रहे हैं. निदाल नुबा माउंटेन्स की पहली महिला सर्जन बनना चाहती हैं और अज़ीज़ पूर्व सैनिक हैं. जोसेफ़ उम्मीद करते हैं कि एक दिन ये दोनों उनकी मुहिम को आगे ले जाएंगे. यह फिर कभी ख़त्म न होने वाली जंग और लोगों के मन पर पड़ने वाले उनके गहरे निशानों को दिखाती है. इस फ़िल्म में दिखाए गए लोग उस भविष्य की राह तक रहे हैं, जिसमें जंग एक धुंधली याद बनकर रह गई हो.
Credit: DW Documentary हिन्दी